वे नाराज़ हुए हमसे

सितारों की करामात कहो

या गुस्ताखी खुद की ,

हमारा मिलना गवारा न होता

रूह अगर आवारा न होता ||

सम्भले हम

साथ उनका जो नसीब हुआ ,

साँसों में सिमटा वो नाम

साथ रह सका, साथ जी न पाया !!

मुलाक़ात फरमाये उस अजनबी से

गर्दिश में  हम हो जाते जिनके फनाह,

वे नाराज़ हुए हमसे कुछ इस कदर

न जान दे सका, न छुड़ा  पाया ||

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