तुझे तेरी दुनिया मुबारक

खुश होना चाहिए मुझे

आज वो ख़ुशी का दिन है
जिसका मुझे सदियों से इंतज़ार था |
पर मेरी खुशियां कुछ उलझ सी गयी हैं ||

जानता हूँ मेरी खुशियां मेरी रूह में हैं |
फिर भी रहता इंतज़ार उनकी एक झलक का,
एक मुलाकात नहीं..
एक पैगाम ही सही ||

अब दोष दूँ उन्हें कैसे..
जिन्हे हमसे मोहब्बत तो है
पर आशिकी नहीं |
दीवाना मैं उनका
उन्हें शायद मेरी याद भी नहीं आती ||

इक सुलझा मुकाम इस दिल में है |
उनकी उँगलियों मैं ज़िन्दगी उलझत्ति गयी..
सम्भालना चाहा
तो कच्चे धागे की तरह काट दिया |
अब सुलझे वो, दर्द मुझे खा गया ||

काश मैं ज़िन्दगी से कह पाता –
तू जुडी सब के साथ है,
तेरे बिना मैं नहीं..
मेरे बिना तेरा वजूद नहीं ||
तू गम दे, बक्श खुशियाँ,
जो तू मेरे साथ नहीं –
मेरी सांसें नहीं ||
मर मिटटून भी मैं कैसे ?
मेरे बिछड़ने का तुझे ग़म नहीं |
जीयूं भी मैं कैसे ?
न मेरे जीने की ख़ुशी तुझे,
न मेरे साथ की ज़रुरत तुझे |
तू जी रही अपने स्वार्थ से –

तुझे तेरी दुनिया मुबारक ||

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